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मौलसरी (बकुल) का वृक्ष - Maulshree Ke Ped

Photo Credit - Wallpapertip


मौलसरी या बकुल के पेड़ (Maulshree Tree in Hindi) का नाम आपने अवश्य सुनी होगी। हो सकता है आपने उसे देखी भी होगी। तो यहाँ हम मौलश्री यानि बकुल के पेड़ (Bakul Ke Ped) की बात करेंगे। जैसा आप सभी जानते हैं, पेड़ - पौधे हमारे मित्र हैं। हमारा कर्तव्य हैं कि हम उन्हें अधिक से अधिक जाने और उनकी देख-भाल करें। तो यहाँ हम इसी कड़ी में अब मौलश्री के पेड़ बारे में बात करेंगे।


Herbal Trees in India - मौलश्री का पौधा


मौलसरी एक औषधीय वृक्ष है। भारत में इसकी गिनती आयुर्वेदिक पौधे (मेडिसिनल प्लांट–Herbal Tree) में होती हैं। मौलसरी के पेड़ को कई नामो से जाना जाता हैं। क्षेत्र और भाषा के अनुसार लोग इस पेड़ को अलग अलग नामो से जानते हैं। कई जगहों पर यह बकुल के नाम से ज्यादा प्रसिद्द हैं तो कई जगहों पर लोग इसे मौलसिरी या मौलसीरी या मोलसरी या मौलश्री के नाम से ज्यादा जानते हैं। मौलश्री को संस्कृत में बकुल, चिरपुष्प, स्थिरपुष्प भी कहा जाता हैं तो अंग्रेजी में इसे स्पेनिश चेरी (Spanish cherry) और मिमसोप्स एलेन्गी (Mimusops Elengi) कहा जाता हैं।


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Maulshree Ka Ped (मौलश्री का पेड़) Kaisa Hota Hai :- >


मौलसरी का वृक्ष बहुत घना होता हैं। इसकी ऊँचाई 15 से 25 मीटर तक हो सकती हैं। यह वहां के वायुमंडल और मिट्टी के ऊपर निर्भर करती हैं। बकुल एक सदाबहार, उष्णकटिबंधीय पेड़ हैं। यानि इसके पेड़ पुरे बर्ष हरे भरे रहते हैं। मौलश्री (Maulshree Ka Ped) यानि बकुल का वृक्ष भारत, श्रीलंका, बर्मा, थाईलैंड, इंडोनेशिया, अफ्रीका, फिलीपींस, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका आदि देशो में पाया जाता हैं।


Bakul flower kaise hote hai : - >


बकुल के पत्ते (Bakul Ke Patte) चमकीले, हरे और नींबू जैसी सुगंध वाले होते हैं और इसके फूल की सुंदरता की क्या कहने ! इसके फूल बहुत ही सुगन्धित होते हैं। जहाँ यह पेड़ लगा होता हैं। वहां के आस पास का वातावरण सुगंध से भर जाता हैं। विशेष कर संध्या के समय इसकी सुगंध अधिक होती हैं। बकुल के फूल हल्के पीले व सफेद रंग के होते हैं। फूलो की बनावट तारो के जैसी होती हैं। ये फूल आकार में छोटे होते हैं। बकुल के पुष्प में यह विशेषता हैं कि इसके सूख जाने पर भी इसमें सुगंध बनी रहती हैं। इस पेड़ की विशेषता यह हैं कि इसमें अधिक पानी की आवश्यकता नहीं होती हैं। इसके फूल वृक्ष से टूटकर निचे भूमि पर बिखड़ जाते हैं। इससे आस पास का वातावरण सुगंधित होता रहता है।



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मौलसरी का सनातन धर्म में विशेष महत्व हैं – (Molshree tree In Hindi) :- >


मौलश्री अर्थात मौलसरी का सनातन धर्म में विशेष महत्व हैं। यह पेड़ सनातन धर्म में अति शुभ माना जाता हैं। इसके पुष्प की माला को भगवान भोले शंकर को अर्पित करने से भगवान भोले शंकर प्रसन्न होते हैं। इसके पुष्प की माला को प्रत्येक सोमवार भगवान शिव को अर्पित करना चाहिए। इससे भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती हैं। इसके पुष्प चंद्र दोष निवारक भी हैं। इसलिए जिस व्यक्ति को चंद्र दोष परेशान कर रहा हैं। वो इसका प्रयोग कर सकते हैं। मंगल दोष वाले लोग या मांगलिक स्त्री - पुरुष हर मंगलवार के दिन इसके जड़ में जल चढ़ा सकते है। ऐसा उन्हें कम से कम 21 मंगलवार तक नियमित करना चाहिए। इससे मंगल दोष में कमी आती हैं। इसलिए मांगलिक स्त्री - पुरुष के लिए यह पेड़ ग्रह दोष निवारक होता हैं।



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बकुल का पेड़ वास्तु दोष निवारक भी हैं :- >


इतना ही नहीं बकुल के वृक्ष (Bakul Ka Plant) वास्तु दोष निवारक भी हैं। इसलिए यदि किसी के घर में वास्तु दोष हैं तो वो इस पेड़ को घर के पास लगा सकते हैं। वैसे भी बकुल का पेड़ शुभ होता हैं। इससे न केवल घर के आस पास का वातावरण सुगन्धित रहता हैं बल्कि सकारात्मकता (positivity) बनी रहती हैं और मन से नकारात्मक्ता (negativity) दूर होती हैं। घर के बाहर इस पेड़ को पूरब या उत्तर दिशा में लगाना अधिक लाभकारी माना जाता हैं।

इसके फल पक्षियों को भी आकर्षित करते हैं। जहाँ बकुल के पेड़ होते हैं वहां ढेर सारे पक्षियों का जमघट लगा रहता हैं। जब तक पेड़ पर फल लगा रहता हैं तब तक यह उनके भोजन और आश्रय का माध्यम बनता हैं। इसका पेड़ बहुत ही हराभरा, घना और छायादार होता है। इसके पत्ते चमकीले होते हैं। समूचा वृक्ष अत्यंत हरा भरा व आकर्षक होता हैं, जो किसी को भी अनायाश अपनी ओर आकर्षित करने के लिए पर्याप्त हैं।



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Ayurvedic Tree In Hindi :- (Herbal Ke Ped in Hindi)


मौलश्री (बकुल) का पेड़ एक औषधीय पेड़ (Medicinal Trees in Hindi) हैं। इस पेड़ (Bakul Ka Paudha) के हर भाग का उपयोग आयुर्वेद में होता हैं। दाँत और मसूढ़े के लिए यह बहुत लाभकारी हैं। इसलिए इसका एक नाम बज्रदन्ती भी हैं। आपने एक मंजन के नाम के साथ ' बज्रदन्ती ' शब्द अवश्य सुना होगा। ये वही बज्रदन्ती हैं। इसके डालो का उपयोग दातुन के रूप में करना बहुत लाभकारी होता हैं। इसके छालो का उपयोग दंतमंजन के निर्माण में भी होता हैं। बकुल के छाल अन्य कई रोगो के उपचार में भी काम आता हैं। बकुल के छाल के काढ़े में पीपल, शहद और घी मिलाकर कुछ देर तक मुख में रखने से दाॅतो का दर्द ठीक हो जाता है। इसके छाल के काढ़े से कुल्ला करने पर भी दाँत दर्द, पायरिया, हिलते हुए दांत में जबर्दस्त आराम मिलता हैं। बकुल के पेड़ दाँतो और मसूढ़ों के लिए रामबाण माना जाता हैं।



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Aushadhiya Ped Paudhe => Medicinal Trees In India In Hindi


बकुल का (Bakul Ka Ped) उपयोग घाव को सुखाने में भी होता हैं। इसका उपयोग सिरदर्द में भी बहुत असरदार हैं। बकुल (Molshri Tree) के सुगन्धित फूलो को सिर के नीचे रखकर सोने से सिरदर्द दूर होता है। इसके अलावे बकुल के अर्क को भी सर में लगाने से लाभ होता हैं। इसके अलावे यह (Bakul ka Vriksh) हृदयरोग, खांसी, प्रदर आदि बिमारियों में भी लाभकारी हैं।


Written By

Rajiv Sinha



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