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क्या आपने सिंदूर का पेड़ देखा है, जानिए - Sindoor Plant in India


सिंदूर के पेड़ (Sindoor Plant) : -


सिंदूर का सनातन धर्म एवं संस्कृति में कितना महत्व है, ये सबको पता है। शादी के बाद हिन्दू स्त्रियां जहाँ इन्हे अपनी मांग में लगाती है तो वही देवी की पूजा में भी स्रियों के द्वारा सिंदूर के प्रयोग करने का विधान है। इतना ही नहीं सिंदूर राम भक्त श्री हनुमान जी को भी चढ़ाया जाता है।

लेकिन शायद बहुत से लोगो को ये ज्ञात नहीं होगा कि सिंदूर, दुकानों में नहीं पेड़ यानि वृक्ष पर मिलता है। अगर आपको जानकारी नहीं है तो इस बात की जानकारी आज आपके लिए आवश्यक है और वो ये है कि अन्य वनस्पति की तरह सिंदूर का भी वृक्ष होता है और सिंदूर वृक्ष पर फलता है। और इतना ही नहीं, इसमें बिना कुछ मिलाये सीधे तौर पर इसको उपयोग में लाया जाता है।


सिंदूर का पेड़ कैसा होता है (Sindoor Ka Ped Kaisa Hota Hai) : -


अगर आप ये सोच रहे होंगे की हम किसी दूसरे प्रकार के सिंदूर की बात कर रहे है तो आप सही नहीं है। हम उसी सिंदूर की बात यहाँ कर रहे है, जो लाल रंग का एक चमकीला-सा चूर्ण होता है और जिसे हिन्दू विवाहित स्त्रियां अपनी मांग में भरती है। इतना ही नहीं स्रियों के द्वारा देवियों की पूजा बिना सिंदूर के अधूरी मानी जाती है। लेकिन सनातन धर्म में पुरुषो के द्वारा देवी की पूजा में सिंदूर का प्रयोग पूर्णतः वर्जित है।


कमीला का पौधा (Sindur Ka Paudha): - Sindur Ka Plant


तो हम यहाँ बात कर रहे है सिंदूर के पेड़ (Kamila Tree) का। तो जिन्हे जानकारी नहीं है, उन्हें इस बात की जानकारी आज होनी चाहिए कि सिंदूर के पेड़ यानि सिंदूर के वृक्ष का नाम - कमीला है। कमीला का पेड़ बीस से पच्चीस फीट तक ऊँचा होता है। यानि अमरुद के वृक्ष जितना ही इस वृक्ष का भी फैलाव होता है। ऊंचाई में भी ये लगभग अमरुद के वृक्ष जितना ही होता है।


सिंदूर का पौधा कहां मिलता है


पहले यह हिमालय के तराई क्षेत्रो में ही हुआ करता था। लेकिन हाल के बर्षो में लोगो की जनजागृति के कारण अब ये करीब करीब देस के हर भाग में देखा जा सकता है और जैसे जैसे लोगो को इस वृक्ष के बारे में जानकारी होती जा रही है वैसे वैसे इस पेड़ की संख्या में भी वृद्धि होती जा रही है। सिंदूर का पेड़ आय का भी एक अच्छा साधन है क्योकि सिंदूर का वृक्ष एक औषधीय वृक्ष है और यह हमारे लिए बहुत ही उपयोगी है।



Sindoor Plant (सिंदूर का पौधा) Botanical Name -- Bixa Orallana : -


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सिंदूर के पेड़ का हिंदी नाम कमीला है जबकि संस्कृत भाषा में कमीला को कम्पिल्लक या रक्त चूर्णक कहा जाता है। वही अंग्रेजी में इसको बिक्सा ओरेलेना ( Bixa Orellana ) कहा जाता है। लेकिन अंग्रेजी के आम बोलचाल में इसको लिपस्टिक ट्री (Lipstick Tree) के नाम से जाना जाता है।

सिंदूर के वृक्ष - अर्थात कमीला के पेड़ कुछ बर्षो पहले तक हिमालय के तराई क्षेत्रो में ही हुआ करता था मगर धीरे धीरे जन जागृति होती गई और अब ये देश के हर ओर देखने को मिल जाता है। अब प्रश्न है की यह किस प्रकार के वातावरण व मिटटी में लगाया जा सकता है। तो इसका उत्तर ये है की इसे सामान्य पेड़ की भांति देश के किसी भी सामान्य वातावरण वाले स्थानों व सामान्य मिटटी में लगाया जा सकता है। केवल बर्फीली व रेगिस्तानी क्षेत्रो में इसे नहीं लगाया जा सकता है। इसके एक वृक्ष से प्रतिवर्ष लगभग आठ से दस किलो तक या उससे भी अधिक सिंदूर निकाला जा सकता है


सिंदूर का पौधा (Sindur Ka Ped) कैसे उगाये - सिंदूर का वृक्ष कैसे लगाए : -


अब प्रश्न है सिंदूर का पेड़ कैसे उगाते है। तो इसका उत्तर यह है कि इसे दो तरह से लगाया जा सकता है। या तो इसके बीज के द्वारा इसे लगाया जा सकता है या फिर पहले से तैयार वृक्ष की कलम के द्वारा भी इसे लगाया जा सकता है। मार्केट में इसके बीज आसानी से उपलब्ध है। सिंदूर के पेड़ को तैयार होने में करीब तीन से चार बर्ष का समय लग जाता है। वृक्ष लगाने के तीन से चार बर्ष बाद इसमें फल आने लगते हैं।


How to make Sindoor from Sindoor Plant : -


कमीला के वृक्ष पर फल गुच्छो में लगते है जो शुरू में हरे रंग का होता है लेकिन बाद में ये फल लाल रंग में बदल जाता है। उन फलो के अंदर ही सिंदूर होता है। वे सिंदूर मदर के छोटे छोटे दानो के आकार में होता है। जिसको पीस कर बिना किसी दूसरी चीजों की मिलावट के सीधे तौर पर प्रयोग में लाया जाता है। यह शुद्ध है और स्वास्थ्य के लिए हर तरह से उपयोगी भी है। इसके प्रयोग से कोई साइड इफ्फेक्ट नहीं होता है।

इस सिंदूर का प्रयोग केवल माथे पर लगाने के लिए ही नहीं किया जाता बल्कि इसका प्रयोग भोज्य पदार्थो को लाल रंग देने में भी होता है यानि इसे खाया भी जाता है। यह स्वास्थ्य के लिए पूरी तरह से सुरक्षित है। इसके कोई साइड इफ्फेक्ट नहीं है। कमीला के वृक्ष से निकलने वाले सिंदूर का प्रयोग उच्च श्रेणी की लिपस्टिक बनाने में भी किया जाता है। इसी कारण कमीला के वृक्ष को अंग्रेजी में लिपस्टिक ट्री कहा जाता है।


सिंदूर का पेड़ (Sindoor Ka Ped) कैसा होता है : - असली सिंदूर कैसे बनता है --


कमीला के फल की तरह इसके तने भी हल्की लालिमा लिए होता है। परिपक्व होने पर उनमें फूल और बीज आने लगता हैं। फूल गुलाबी रंग का होता है। शरद ऋतु में वृक्ष फल से भर जाता है। इसके वृक्ष पर जनवरी फरवरी में फूल और मार्च तक फल आ जाते हैं। इसके फलो के अंदर मिलने वाले बीजों को बिना कुछ मिलाए विशुद्ध सिंदूर, रोरी , कुमकुम की तरह प्रयोग किया जाता है। इसके बीजों के सुख जाने पर उसको बिना कुछ मिलाये केवल पीसकर सिंदूर बनाया जाता है। स्त्रियां इस वृक्ष की पूजा किया करती है। क्योकि ये वृक्ष सुहाग का प्रतिक और शुभ व मंगलकारी माना जाता है।

कमीला का पेड़ (सिंदूर का पेड़ ) भारत का एक औषधीय पेड़ है ( herbal trees in india ) : -


सिंदूर के वृक्ष (Sindur Ke Ped) का ढेर सारा औषधीय प्रयोग भी होता है। चर्म रोग के उपचार में इसके सिंदूर का विभिन्न तरीके से प्रयोग किया जाता है। पत्तियों को शरीर पर होने वाले सफ़ेद दाग के उपचार में भी प्रयोग किया जाता है। सफ़ेद दाग वाले स्थान पर कमीला के पत्ते को घिसने पर सफ़ेद दाग मिट जाता है। इसके सिंदूर को माथे या ललाट पर लगाने से मानसिक शांति मिलती है। पहले के लोग कमीला के पेड़ का उपयोग चर्म रोग के उपचार में किया करते थे। इस प्रकार औषधीय गुणों से भरपूर कमीला को कई बिमारियों के उपचार में प्रयोग किया जाता है। लेकिन धीरे धीरे सभ्यता विकसित होती चली गई और ये कीमती वृक्ष हमसे दूर होता चला गया।


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मान्यता है जब माँ सीता भगवान राम के साथ वन गमन पर थी तब इसी वृक्ष के फल से मिलने वाले सिंदूर को अपनी मांग में लगाया करती थी। इसके फलो के अंदर मिलने वाले ये सिंदूर छोटे छोटे मटर के दाने के आकर के होते है। वास्तव में यह शुध्द और प्राकृतिक सिंदूर है और इसके प्रयोग से बाज़ारो में मिलने वाले सिंदूर की तरह कोई साइड इफ्फेक्ट नहीं होता है। इसमें अलग से कुछ भी मिलाने की आवश्यकता नहीं होती है। सुखी हुई फली को केवल पीस कर इसका प्रयोग किया जाता है। कच्ची अवस्था में इसकी फली को केवल हाँथ की अगुंलियों के दवाब से ही दवा कर उसके हल्का गिला पेस्ट प्राप्त किया जा सकता है। इस फली का आकर मटर के दाने जैसा होता है।


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बाजार में मिलने वाले कई सिंदूर में केमिकल मिला दिया जाता है। जिससे लम्बे समय तक इसका प्रयोग करने पर कई स्त्रियों में त्वचा रोग या उनके बाल झड़ने जैसी समस्या उत्पन्न हो जाती है। क्योकि बाजार में मिलने वाले सिंदूर में कई हानिकारक रासायन की मिलावट होती है जिसके कारण इसका लम्बे समय तक प्रयोग करने से स्त्रियों में सर दर्द, त्वचा रोग, जी मिचलाने की शिकायत, साँस लेने में समस्या आदि हो सकती है।


(Herbal Ke Ped in Hindi)


जबकि प्राकृतिक सिंदूर अर्थात कमीला के वृक्ष (Sindur Ka Ped) से प्राप्त सिंदूर के दूर दूर तक कोई भी साइड इफ्फेक्ट नहीं है। इसका प्रयोग कितने भी समय तक किया जाये, इससे किसी भी तरह की कोई हानि नहीं होती है। बल्कि इससे लाभ ही है। क्योकि ये सिंदूर प्राकृतिक है। ये सिंदूर पेड़ पर फलता है। अगर स्त्रियां इस प्राकृतिक सिंदूर का उपयोग करती है तो वे निश्चित रूप से सिंथेटिक सिंदूर से होने वाली हानि से सुरक्षित रहेगी। क्योकि ये प्रकृति से प्राप्त शुद्ध सिंदूर है। वैसे अगर आपको असली सिंदूर का पता लगाना हो आप सिंदूर के बिषय में इस बात की जानकारी अपने ध्यान में रख सकते है। असली सिंदूर पानी में नहीं घुलता और न ही यह किसी भी चीज पर रंग छोड़ता है।


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जबकि बाजार में मिलने वाला सिंदूर या सिनाबार पाउडर आमतौर पर नारंगी या लाल रंग का होता है। लाल रंग के सिंदूर बनाने के लिए कम्पनियाँ लाल रंग का मरकरी सल्फेट नामक रासायन का प्रयोग कर रही है जो स्कीन के संपर्क में आने पर सफ़ेद रंग का निशान छोड़ देता है। साथ ही इसके लगातार प्रयोग से कई प्रकार की बीमारियां होने की संभावना भी बनी रहती है। कम्पनियाँ केवल सिंदूर में ही मिलावट नहीं कर रही है बल्कि ये कम्पनियाँ रोरी, चंदन में भी कई प्रकार की हानिकारक रासायनों की मिलावट कर रही है।


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बाज़ार में मिलने वाले सिंथेटिक सिंदूर प्रायः पाउडर के रूप में लाल रंग का पीसा हुआ कच्चा सीसा होता है जो, स्वास्थ्य के लिए हर तरह से हानिकारक है और लम्बे समय तक इसका प्रयोग करने से कई तरह की बीमारियों के होने का संकट बना रहता है। इसलिए हमें प्रकृति की ओर लौटना चाहिए और सनातन धर्म का कड़ाई से पालन करते हुए जीव जंतु, मानव व वनस्पति की रक्षा के लिए आगे आना चाहिए। तभी हम मानव सभ्यता को एक सुंदर व शांत वातावरण प्रदान कर सकते है।



Written By

RS


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