Hi Zindagi - मनोरंजन के साथ प्रेरणा भी - A Motivational Web Series Script In Hindi

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Short_Film-Hello_Jindagi-Script_Written_by_Rajiv_Sinha

🎬 सारांश (Synopsis)

"हेलो जिंदगी" हिंदी वेब सीरीज / फिल्म एक प्रेरणादायी (Inspirational Hindi Web Series) कहानी पर आधारित है। इसमें मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा भी छिपी हुई है (Motivational Hindi Web Series)... वास्तव में, इसकी कहानी कहीं न कहीं हमारी रियल लाइफ के आस-पास घूमती हुई प्रतीत होती है और अंत में इससे एक संदेश भी मिलता है।

इस वेब सीरीज की स्टोरी एक मिडिल क्लास फैमिली के पिता और पुत्र के ऊपर घूमती है।

50 वर्ष के 'वि. के.' एक मिडिल क्लास सिटी के एक कॉलेज के आर्ट्स डिपार्टमेंट में क्लर्क के पद पर कार्यरत हैं। 'वि. के.' का फुल फॉर्म क्या है, यह कॉलेज के कम ही स्टूडेंट को मालूम है। विशेषकर नए आगंतुक विद्यार्थियों के लिए यह किसी क्विज़ जैसा होता है। अगर किसी को उनके नाम का फुल फॉर्म मालूम होता है तो उस विद्यार्थी को उस कॉलेज का पुराना विद्यार्थी मान लिया जाता है।

वैसे यह एक राज़ का विषय है, तो हम भी यहाँ उसे एक राज़ ही रहने देते हैं और अब आगे बढ़ते हैं।

तो हम बात कर रहे थे 50 वर्ष के वि. के. की, जो कॉलेज के आर्ट्स डिपार्टमेंट में एक क्लर्क के पद पर आसीन हैं। वि. के. में वैसे तो सब कुछ नॉर्मल है लेकिन उनमें ऐसी कुछ बातें हैं जो उन्हें दूसरों से थोड़ा अलग करती हैं। जैसे कि वो किसी न किसी बात को लेकर हमेशा परेशान रहते हैं। वि. के. को कॉलेज की सिस्टम / प्रबंधन (Administrative System / Management System) से लेकर राज्य, शहर तक के सिस्टम में कमी दिखती है। वो हमेशा सभी में कमी निकालते रहते हैं मगर उन कमियों को दूर करने के लिए वो स्वयं कभी भी कोई कोशिश नहीं करते हैं।

हाँ, एक कोशिश वो जरूर करते हैं और वो है — दूसरों को निःशुल्क राय देना, दूसरों को पकड़-पकड़ कर उपदेश देना। इस जिम्मेदारी में वो हमेशा आगे रहते हैं और वो इसे अपने कर्तव्य की तरह निभाते हैं।

जब कभी मौका मिलता है और कोई स्टूडेंट खाली समय में उनके सामने पड़ जाता है, फिर मजाल है वो उनकी नजर से बचकर निकल जाए। वो उसको बिना ढेर सारी शिक्षा दिए जाने नहीं देते हैं। इसलिए कई स्टूडेंट उन्हें "नैतिक शिक्षा मंत्री" के नाम से पुकारने लगे हैं। वो दूसरों को ढेर सारी शिक्षा देते हैं मगर स्वयं कभी भी उन बातों का पालन नहीं करते हैं। वो कॉलेज में फ्रेंडशिप को बुरा मानते हैं, स्टूडेंट को प्रेम-प्यार से दूर रहने की सलाह देने में पीछे नहीं रहते हैं। मगर वो स्वयं कॉलेज की महिला स्टाफ के साथ इश्कबाजी करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ते हैं।

वि. के. की आदत है — दोष निकालना, मगर उन दोषों को दूर करने में उन्हें कभी कोई रूचि नहीं रही है। उनका कहना है, "मैं तो एक मिडिल क्लास फैमिली का एक मामूली सा क्लर्क हूँ। मेरे पास इतनी पावर कहाँ है कि मैं कुछ कर सकूँ। मैं तो केवल कमी निकाल सकता हूँ और वो मैं करता हूँ और आगे भी करता रहूँगा।"

"वि. के." का एक और अजीब नेचर है। वो किसी के पीठ पीछे जितना बोलें मगर मजाल है सामने में वो कभी भी उसकी बुराई बता दें। बिल्कुल नहीं! सामने में वो एक मृदुभाषी की तरह पेश आते हैं। वो किसी के सामने ऐसे पेश आते हैं मानो वो उनके जीवन का सबसे प्रिय इंसान हो। "वि. के." के इसी भुलावे में कई लोग आ जाते हैं। दूसरों की बात तो दूर, स्वयं कॉलेज के प्रिंसिपल भी उनके भुलावे में रहते हैं और उन्हें एक मृदुभाषी मानव मानने की भूल कर बैठे हैं। जबकि "वि. के." कॉलेज के प्रिंसिपल के कट्टर आलोचक हैं। अब यह कलयुग है और "वि. के." में भी कलयुगी लक्षण हैं — वो अपनी इसी चालाकी के कारण इस बेरहम जिंदगी में भी मलाई खाने में सफल रहे हैं।

लेकिन 50 वर्षीय "वि. के." के भी दो सपने हैं। पहला — "उनका इकलौता बेटा रौशन बड़ा आदमी बन जाए, समाज के लोग उसका नाम सम्मान के साथ लें!" और दूसरा — "Administrative System में सुधार हो!"

इसलिए "वि. के." अपने बेटे रौशन को यूपीएससी की तैयारी जी-जान से करने के लिए कहते हैं और उससे कहते हैं कि इसके लिए उसे पैसे की चिंता करने की जरुरत नहीं है। चाहे इसके लिए कर्ज ही क्यों न लेना पड़े, लेकिन वो अपने बेटे को एक "बड़ा आदमी" बना हुआ देखना चाहते हैं।

जबकि रौशन अपने पिता "वि. के." से बिल्कुल ही विपरीत स्वभाव का है। अगर उसे कोई कमी दिखती है तो वो अपनी क्षमता के अनुसार उसे दूर करने की ईमानदारी से कोशिश करता है। लेकिन उसमें भी एक कमी है कि वो अपने पिता के गलत निर्णय के विरुद्ध भी हाँ में हाँ मिलाता रहता है। वो अपने पिता के गलत निर्णय का विरोध नहीं करता है, जिसके लिए आगे चलकर उसे एक बड़ी कीमत चुकानी पड़ती है।

रौशन अपने पिता के सपने को साकार करने के लिए यूपीएससी एग्जाम की तैयारी में जुट जाता है। जबकि वो जानता है कि आईएएस जैसे सबसे टफ कॉम्पिटिशन को निकालना उसके वश में बिल्कुल भी नहीं है। मगर फिर भी वो पिता के सपने को पूरा करने के लिए पूरी ईमानदारी के साथ कोशिश करता है। मगर अंतिम कोशिश के बाद भी वो सक्सेस नहीं कर पाता है।

इस असफलता से रौशन निराश है मगर उनके पिता "वि. के." निराश नहीं हैं। अब वो अपने बेटे को आगे बढ़ाने के लिए दूसरा रास्ता निकालते हैं। वि. के. अब अपने बेटे को एमएलए (MLA) के इलेक्शन में खड़ा करने का निर्णय लेते हैं। बेटा नहीं चाहता है मगर पिता की जिद के आगे वो तैयार हो जाता है। कोई भी पार्टी रौशन को टिकट नहीं देती है, मगर वि. के. को इससे ज्यादा चिंता नहीं होती है। वो अपने खर्च पर बेटे को निर्दलीय खड़ा करते हैं। पिता के सपने को पूरा करने के लिए रौशन अब चुनाव जीतने के लिए पूरी जोर लगा देता है। मगर वो बुरी तरह से चुनाव हार जाता है और उसकी जमानत जब्त हो जाती है।

अंत में "वि. के." भी निराश हो जाते हैं। उनके सपने टूटते हुए दिख रहे हैं। लेकिन रौशन निराश नहीं है। अब वो अपनी क्षमता पर ध्यान देता है कि वो क्या कर सकता है... और आगे चलकर वो अपने पिता वि. के. के दोनों सपनों को साकार करता है। लेकिन कैसे...??

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Hi Zindagi...!!

Motivational Web Series / Film Script

Status: Continue... (Producers/Makers can contact for this script)

Target Budget: Big Budget Movie (Not for small budget)

🎬 Script Acquisition & Optioning Enquiries

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Writer Credentials & Details:
  • Screenwriter: Rajiv Sinha (Delhi-Based Writer)
  • Membership: Screenwriters Association (SWA), Mumbai (No. 59004)
  • Format Availability: Feature Films, Web Series & Short Films
© All Rights Reserved. इस कथा/स्क्रिप्ट का सर्वाधिकार लेखक के पास सुरक्षित है। बिना अनुमति किसी भी प्रकार से प्रतिलिपि (Copying), रूपांतरण (Adaptation) या व्यावसायिक उपयोग करना कॉपीराइट नियमों के विरुद्ध है।

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