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हिमाचल प्रदेश की लोककथा - मेमने की मम्मा

यह कहानी हिमाचल प्रदेश की एक लोक कथा हैं और यह बहुत मार्मिक भी है। तो पढ़िए हिमाचल प्रदेश की लोककथा को - और पढ़कर जीव जन्तुओ की रक्षा के लिए जरूर सोचिये - साथ ही, हो सके तो जीव जन्तुओ की रक्षा के लिए अपनी ओर से निष्ठापूर्ण प्रयास भी कीजिये। धन्यवाद !

:: हिमाचल की एक पहाड़ी पर छोटा सा एक गांव था। वही पर एक आदमी अपने परिवार के साथ रहा करता  था। उसके पास बहुत सी भेड़, बकरियां थी।

एक दिन वहां ढोलकी बेचने वाला आया । वह ढोलकी बजा बजा कर लोगों से ढोलकी खरीदने के लिए आवाज दे रहा था। बाकी ढोलकिया उसका बेटा बड़ी - सी टोकरी में रख कर साथ-साथ चल रहा था। तभी उस आदमी का मेमना ढोलकी की आवाज सुनकर घर से बाहर निकल गया और उस ढोलकी वाले के पीछे पीछे चलने लगा।

उस आदमी की पत्नी उसे पकड़ने के लिए दौड़ी। पर मेमना ढोलकी वाले की पैंट मुंह में दबाए खड़ा रहा। वह उसे आगे नहीं जाने दे रहा था। ढोलकी वाले को भी समझ नहीं आ रहा था कि वह नन्हा सा मेमना इस तरह का व्यवहार क्यों कर रहा है???

वह नीचे बैठ गया और ढोलकी एक तरफ रख कर नन्हे मेमने को सहलाने लगा । तब नन्हा मेमना ढोलकी वाले को छोड़ ढोलकी के चमड़े को चाटने लगा । मौका पाते ही उस आदमी की पत्नी उसे गोद में उठाकर घर वापस आ गई । लेकिन फिर भी वो मेमना ढोलकी वाले के पास जाने के लिए छटपटाता रहा ।

इस तरह अब जब भी वह ढोलकी बेचने वाला उठाकर के घर के पास से निकलता, तब - तब मेमना घर से बाहर निकल जाता और ढोलकी वाले के पीछे पीछे चलने लगता। उस आदमी की पत्नी उस मेमने को फिर दूर दूर से ढूंढ ढूंढ कर लाने लगी।



Delhi Based Hindi Writer - R S



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एक दिन परेशान होकर उसने अपने शौहर (पति) से कहा कि जब भी ढोलकी वाला अपनी ढोलकी बजाता हुआ यहां से गुजरता हैं। अपना मेमना उसके पीछे पीछे चला जाता है। रोज रोज इसको ढूंढ कर लाने में, मैं बहुत परेशान हो गई हूँ।

अपनी बेगम की बात सुनकर वो आदमी मेमने को उठा कर उसे प्रेम से सहलाने लगा। लेकिन तभी बाहर ढोलकी की आवाज सुनाई दी । ढोलकी की आवाज कान में पड़ते ही मेमना उस आदमी के हाथों से फुर्ती से कूदक कर पहले की तरह फिर से ढोलकी वाले के पीछे पीछे भाग गया ।

उस आदमी भी यह देखकर हैरान रह गया। फिर वह भी अपनी बेगम (पत्नी) की भाँति नन्हे से मेमने के पीछे पीछे भागने लगा। उस आदमी ने दूर से ही अपने मेमने को देखा की उसका नन्हा सा मेमना ढोलकी वाले के पास जाकर ढोलकी को छूने के लिए ऐसे उछलने लगा मानो वो कोई निर्जीव ढोलकी नही बल्कि उसकी जीती जागती असली माँ हो ।


दूर खड़ा वो आदमी यह सब देख रहा था । उसने दूर से ही ढोलकी वाले को रुकने के लिए आवाज लगाई और उसे अपने पास बुलाया। ढोलकी वाला जब उसके पास आया तो वो उसे तत्काल पहचान गया। उस ने ढोलकी वाले से कहा, "तुम तो वही हो ना जो पिछले महीने ढोलकी बनाने के लिए मुझसे भेड़ की खाल ले गए थे?"

ढोलकी वाले ने "हां" में सिर हिलाया।

"यह ढोलकी तुमने कब बनाई थी?"

"जब मैं पिछले महीने आपसे भेड़ का चमड़ा ले गया था तभी बनाई थी।"


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वह आदमी बहुत दुःखी होकर भारी मन से मेमने को अपनी गोद में उठाया। वह मेमने को बहुत दुःखी होकर देर तक गौर से ऐसे देखता रहा, मानो उसे किसी घटना का स्मरण होने पर अब गहरा प्रायश्चित हो रहा हो । फिर उसने ढोलकी वाले से वह ढोलकी खरीद लिया और ढोलकी खरीदकर वो उसे अपने साथ घर लें आया।

वास्तव में, ढोलकी में जो चमड़ा लगा था, वह चमड़ा उस नन्हे से मेमने की माँ का था । इस कारण उससे निकलने वाली आवाज को वह नन्हा मेमना पहचान जाता था और उसे अपनी माँ की मौजूदगी का आभाष होने लगता था, जिस कारण वह नन्हा मेमना अपनी माँ के होने के भ्रम में ढोलकी के पास भागा भागा चला जाता था ।

सारी बातो को समझकर उसकी पत्नी रोने लगी। लेकिन मेमना अब भी ढोलकी में लगे चमड़े को बार बार चाट कर अपनी मां के होने का एहसास कर रहा था । पर उस नन्हे मेमने को यह कहा मालूम था कि जिसको वह चाट रहा हैं वह तो उसकी माँ के निर्जीव शरीर के चमड़ा मात्र हैं, उसकी जीवित माँ को तो उन जैसे लोगो ने निर्दयता से मार डाला था।


Written By

Ruby Sinha


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